भ्रामक UPSC विज्ञापनों के लिए CCPA ने वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट पर ठोका 15 लाख रुपये का जुर्माना, दो साल में दूसरी पेनल्टी
CCPA ने UPSC के गुमराह करने वाले विज्ञापनों के लिए वाजिराव और रेड्डी पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बता दें कि ऐसा पहली पहली बार नहीं हुआ है, दो साल में यह दूसरी पेनल्टी है। इस इंस्टीट्यूट ने UPSC सिविल सर्विस एग्जाम 2023 पास करने वाले कैंडिडेट्स को क्रेडिट देने का दावा करते हुए गुमराह करने वाले विज्ञापन छापे थे, जिनमें से कई ने सिर्फ मॉक इंटरव्यू सेशन के लिए एनरोल किया था।CCPA जांच में क्या निकला?बता दें कि इंस्टीट्यूट ने 16 अप्रैल, 2024 को रिजल्ट घोषित होने के तुरंत बाद अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर दावा किया था कि उसने “1,016 वैकेंसी में से 645 से अधिक सिलेक्शन” किए हैं, जिसमें “टॉप 10 AIR में 6” और “टॉप 50 AIR में 35” शामिल हैं। ये दावे इसके रेगुलर कोर्स के एडवर्टाइजमेंट के साथ दिखाए गए, जिससे यह इंप्रेशन बना कि सफल कैंडिडेट को इंस्टीट्यूट ने तीनों स्टेज – प्रीलिमिनरी, मेन्स और इंटरव्यू में ट्रेनिंग दी थी।CCPA ने पाया कि यह जानबूझकर गलत जानकारी दी गई थी। इंस्टीट्यूट द्वारा जमा किए गए एनरोलमेंट रिकॉर्ड की जांच करने पर, अथॉरिटी ने पाया कि काफी संख्या में कैंडिडेट्स ने सिर्फ “इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम” या “मॉक इंटरव्यू” के लिए साइन अप किया था, जिसका मतलब है कि उन्होंने इंस्टीट्यूट से संपर्क करने से पहले ही पहले दो स्टेज खुद से पास कर लिए थे।इसके अलावा 431 एनरोलमेंट फॉर्म में न तो यह बताया गया था कि किस कोर्स में एडमिशन लिया गया है और न ही भरने की तारीख लिखी थी। इंस्टीट्यूट फीस की रसीदें या दूसरे पुष्टि करने वाले डॉक्यूमेंट नहीं दिखा पाया। CCPA ने एक बयान में कहा, “ऐसी जानकारी न देने से यह गलत धारणा बनती है कि सफल उम्मीदवारों को परीक्षा के सभी स्टेज में इंस्टीट्यूट ने ट्रेनिंग दी थी।”बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब इंस्टीट्यूट को रेगुलेटरी एक्शन का सामना करना पड़ा है। इससे पहले UPSC CSE 2022 रिजल्ट से जुड़े अपने एडवर्टाइजमेंट में इसी तरह के नियमों के उल्लंघन के लिए इस पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। बार-बार गलती होने पर CCPA ने इसे बाद में हुआ उल्लंघन माना और अधिक जुर्माना लगाया।Latest Education News
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